सूर्यकुंड धाम

यह एशिया का सबसे बड़ा गर्म कुंड है. मकर संक्रांति के दिन से इस स्थल पर 15 दिवसीय मेले की शुरुआत होती है, यह बरकट्ठा ब्लॉक में हजारीबाग से 72 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर स्थित है। हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन इस जगह से 31 किमी दूर है। यहां पानी का सामान्य तापमान 169 -190 डिग्री फारेनहाइट है।

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सूर्यकुंड धाम

यहां पानी का सामान्य तापमान 169 -190 डिग्री फारेनहाइट है। दो गर्म झरनों के अलावा, एक ठंडा वसंत भी है। उच्च सल्फर सामग्री के कारण पानी का चिकित्सीय प्रभाव होता है। सूर्य कुंड, लक्ष्मण कुंड, ब्रह्म कुंड, राम कुंड और सीता कुंड नामक 5 कुंड हैं। इसके अलावा यहां एक दुर्गा मंदिर भी स्थित है।

स्थानीय पुजारियों के अनुसार, यहां के कुंड के गर्म पानी से नहाने से 36 प्रकार की बीमारियों का उपचार होता है. जिसमें त्वचा रोग से लेकर गैस भी शामिल है। देश-विदेश और दूसरे राज्यों से लोग इसे देखने आते हैं।इस स्थान का सांस्कृतिक महत्व यह है कि इस सूरज कुंड में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पूरी श्रद्धा से जो भी मनोकामना की जाए, वह पूरी होती है।

मंदिर के पुजारी जीवलाल पाण्डेय बताते हैं कि भगवान श्री राम 14 वर्ष के बनवास के लिए जंगल गए थे. उसी वियोग के दुख में राजा दशरथ ने अपनी देह त्याग दी थी. प्रभु श्री राम को जब इस संबंध में जानकारी मिली तो वो उनका पिंड दान करने गया के फल्गु नदी किनारे पहुंचे थे. ठीक उसी समय ऋषि श्रवण कुमार सूर्यकुंड स्थान पर भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे. ऋषि श्रवण कुमार को दर्शन देने के लिए प्रभु श्री राम इस स्थान पर पहुंचे थे. लगातार कठोर तप के दौरान ऋषि श्रवण कुमार को कई प्रकार की बीमारी हो जाती हैं. भगवन श्री राम ऋषि श्रवण कुमार से वरदान मांगने को कहते हैं तो वो ऐसा जलकुंड मांगते है जिसमें नहाने से मानव जाति के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाएं. इसके बाद श्री राम ने वहां बाण मारकर सूर्यकुंड का निर्माण किया था.

इस कुंड और इसके जल के ऊपर कई बार विज्ञानकों ने शोध किया, लेकिन उनको भी खाली हाथ लौटना पड़ा. वे भी ये पता नहीं कर पायें इस कुंड के गर्म जल से स्नान मात्र से कैसे त्वचा के रोगों से मुक्ति मिलती है.जनवरी के माह में यहां 14 तारीक से 31 तारीक तक मेला लगता है. उस दौरान रोजाना लगभग 30 से 40 हज़ार लोग यहां स्नान करते हैं।